गेहूँ की बंपर पैदावार के लिए अपनाएं ये खास तकनीक
जब गेहूँ की फसल लगभग 90 दिन की हो जाती है, तो यह इसकी सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है क्योंकि इस समय बालियाँ निकलने की प्रक्रिया शुरू होती है। इस दौरान पौधे को अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है, ठीक वैसे ही जैसे किसी शिशु के विकास के लिए माँ को बेहतर आहार की जरूरत होती है। यदि इस समय पोषक तत्वों की कमी रह जाए, तो बालियाँ छोटी और दाने कमजोर रह सकते हैं। इसलिए, इस अवस्था में फसल की सही देखभाल ही आपकी मेहनत को बंपर पैदावार में बदल सकती है।
फसल के बेहतर स्वास्थ्य के लिए ‘झंडा पत्ती’ (Flag Leaf) को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि भविष्य में दानों का सारा भराव इसी पत्ती के माध्यम से होता है। यदि आपकी फसल 70-80 दिन की है और उसमें पीलापन दिखाई दे रहा है, तो 1 किलो NPK 0:52:34 के साथ 100 ग्राम चिलेटेड जिंक का प्रति एकड़ छिड़काव करना फायदेमंद रहता है। इससे फसल का पीलापन दूर होता है और क्लोरोफिल की मात्रा बढ़ती है, जिससे पत्तियां हरी और स्वस्थ बनी रहती हैं।
बालियाँ निकलते समय सबसे महत्वपूर्ण भूमिका पोटाश और बोरॉन की होती है। पोटाश न केवल फसल को रोगों और पर्यावरणीय तनाव से बचाता है, बल्कि यह ट्रांसपोर्ट सिस्टम की तरह काम करता है। यह पत्तियों में जमा भोजन को दानों तक पहुँचाने में मदद करता है, जिससे दाने चमकदार, मोटे और वजनदार बनते हैं। इसके लिए आप 1 से 1.5 किलो NPK 0:0:50 (सल्फेट ऑफ पोटाश) का इस्तेमाल कर सकते हैं।
इसके साथ ही, बोरॉन का उपयोग परागण (Pollination) की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। अक्सर देखा जाता है कि बालियों में ऊपर या नीचे के दाने खाली रह जाते हैं, बोरॉन की कमी इसका एक बड़ा कारण हो सकती है। 100 से 150 ग्राम बोरॉन को पोटाश के साथ मिलाकर स्प्रे करने से पूरी बाली में दानों का भराव समान रूप से होता है। ध्यान रखें कि स्प्रे हमेशा दोपहर के समय (2-3 बजे के बाद) करें जब ओस पूरी तरह सूख चुकी हो। इन उपायों को अपनाकर आप अपनी गेहूँ की फसल से शानदार उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।